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पितृ दोष पूजा

पूर्वजों की शांति, पितृ तर्पण एवं पितरों का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए उज्जैन के क्षिप्रा तट, रामघाट एवं सिद्धवट क्षेत्र में किया जाने वाला वैदिक अनुष्ठान।

अवधि
2–4 घंटे
पंडित
वैदिक विद्वान
स्थान
सिद्धवट, क्षिप्रा तट
शुल्क
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Significance

पितृ दोष पूजा का महत्व

पितृ दोष पूजा एक विशेष वैदिक अनुष्ठान है, जो पारंपरिक ज्योतिषीय एवं धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूर्वजों की शांति, पितृ तर्पण एवं पितरों का आशीर्वाद प्राप्त करने के उद्देश्य से की जाती है। हिंदू धर्म में पितरों के सम्मान और उनकी शांति के लिए किए जाने वाले कर्मों को विशेष महत्व दिया गया है।

इस दोष की शांति के लिए तर्पण, पिंडदान, श्राद्ध, मंत्र जाप एवं हवन जैसे अनुष्ठान किए जाते हैं। उज्जैन में क्षिप्रा नदी तट, रामघाट एवं सिद्धवट क्षेत्र जैसे स्थानों पर पितृ कर्म एवं तर्पण की परंपरा रही है।

ॐ पितृभ्यो नमः

पूजा में जल, तिल एवं मंत्रों द्वारा पितरों को तर्पण अर्पित किया जाता है और पितृ शांति मंत्रों के साथ हवन किया जाता है।

Benefits

पितृ दोष पूजा से लाभ

शास्त्रों एवं परंपरा के अनुसार प्राप्त होने वाले प्रमुख फल

पितरों की शांति

पितरों की आत्मा की शांति की कामना की जाती है।

परिवार में सुख-शांति

परिवार में सुख-शांति के लिए प्रार्थना की जाती है।

मानसिक शांति

मानसिक तनाव एवं नकारात्मकता कम करने का प्रयास किया जाता है।

सकारात्मक पारिवारिक संबंध

पारिवारिक संबंधों में सकारात्मकता की कामना की जाती है।

पूर्वजों का आशीर्वाद

पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त करने का प्रयास किया जाता है।

बाधाओं की शांति

जीवन की बाधाओं की शांति के लिए प्रार्थना।

Procedure

पूजा विधि

संकल्प से आरती तक — संपूर्ण अनुष्ठान इस क्रम में संपन्न होता है

01

संकल्प पूजा

जातक का नाम, गोत्र एवं पूर्वजों का स्मरण करके संकल्प लिया जाता है।

02

गणेश पूजन

पूजा को निर्विघ्न पूर्ण करने के लिए भगवान गणेश का पूजन किया जाता है।

03

पितृ तर्पण

जल, तिल एवं मंत्रों द्वारा पितरों को तर्पण अर्पित किया जाता है।

04

पिंडदान एवं श्राद्ध कर्म

पूर्वजों की शांति एवं संतुष्टि के लिए धार्मिक विधियां की जाती हैं।

05

मंत्र जाप एवं हवन

पितृ शांति मंत्रों एवं वैदिक मंत्रों के साथ हवन किया जाता है।

06

आरती एवं प्रसाद वितरण

अंत में आरती की जाती है और प्रसाद वितरित किया जाता है।

Best Time

कब कराएं पितृ दोष पूजा

इन तिथियों एवं परिस्थितियों में यह पूजा कराने की परंपरा मानी जाती है।

अमावस्या

अमावस्या पर पूजा कराने की परंपरा है।

पितृ पक्ष

पितृ पक्ष में तर्पण एवं श्राद्ध कर्म।

विशेष तिथि

विशेष तिथि पर पितृ शांति अनुष्ठान।

कुंडली में दोष

जब कुंडली में पितृ दोष बताया गया हो।

अनुभवी वैदिक पंडित
संपूर्ण पूजा सामग्री
पितृ तर्पण
पिंडदान (पैकेज अनुसार)
हवन एवं पूर्णाहुति
ऑनलाइन पूजा सुविधा
FAQ

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यह पूजा धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूर्वजों की शांति, तर्पण और परिवार में सुख-शांति की कामना के लिए कराई जाती है।
हाँ, उज्जैन में क्षिप्रा नदी तट एवं सिद्धवट जैसे स्थानों पर पितृ कर्म एवं तर्पण की परंपरा है।
अमावस्या, पितृ पक्ष एवं विशेष तिथि पर यह पूजा कराने की परंपरा मानी जाती है।
हाँ, उपलब्ध सुविधा के अनुसार ऑनलाइन संकल्प एवं लाइव पूजा की व्यवस्था की जा सकती है।
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