प्रेत दोष एवं श्रापित दोष पूजा
अशांत आत्माओं एवं पूर्वजों की शांति तथा कुंडली के श्रापित दोष की शांति हेतु उज्जैन के महाकाल, सिद्धवट एवं शिप्रा तट क्षेत्र में कराया जाने वाला वैदिक अनुष्ठान।
प्रेत दोष एवं श्रापित दोष पूजा का महत्व
प्रेत दोष एवं श्रापित दोष पूजा एक विशेष वैदिक अनुष्ठान है, जो पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार अशांत आत्माओं, पूर्वजों की शांति एवं कुंडली में बताए गए श्रापित दोषों की शांति के लिए किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह पूजा परिवार में शांति, सकारात्मक ऊर्जा एवं पूर्वजों के आशीर्वाद की कामना के लिए की जाती है।
इस पूजा में भगवान शिव, भगवान विष्णु, पितृ देव एवं संबंधित ग्रहों की शांति के लिए मंत्र जाप, तर्पण एवं हवन किए जाते हैं। पितृ कर्म, तर्पण एवं शांति अनुष्ठानों के लिए उज्जैन को महत्वपूर्ण तीर्थ स्थानों में माना जाता है।
उज्जैन भगवान महाकाल की नगरी होने के कारण यहाँ दोष निवारण एवं पितृ कर्म से संबंधित पूजा का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है।
प्रेत दोष एवं श्रापित दोष पूजा से लाभ
शास्त्रों एवं परंपरा के अनुसार प्राप्त होने वाले प्रमुख फल
परिवार में सुख-शांति
धार्मिक मान्यता के अनुसार परिवार में सुख-शांति की कामना।
पितरों की कृपा
पितरों की कृपा एवं आशीर्वाद प्राप्त करने का प्रयास।
मानसिक शांति
मानसिक शांति एवं सकारात्मक ऊर्जा की कामना की जाती है।
बाधाओं की शांति
जीवन में आने वाली बाधाओं की शांति के लिए प्रार्थना।
ग्रह शांति
ग्रहों के अशुभ प्रभाव को कम करने की प्रार्थना की जाती है।
आध्यात्मिक संतुलन
जीवन में आध्यात्मिक संतुलन की प्राप्ति की भावना रहती है।
पूजा विधि
संकल्प से आरती तक — संपूर्ण अनुष्ठान इस क्रम में संपन्न होता है
संकल्प पूजा
जातक का नाम, गोत्र एवं पूजा का उद्देश्य लेकर संकल्प किया जाता है।
गणेश पूजन
पूजा में आने वाली बाधाओं की शांति के लिए भगवान गणेश का पूजन।
पितृ एवं देव पूजन
पूर्वजों की शांति एवं आशीर्वाद के लिए तर्पण किया जाता है।
ग्रह शांति पूजा
शनि, राहु, केतु आदि ग्रहों की शांति के लिए मंत्र जाप किया जाता है।
महामृत्युंजय मंत्र जाप
भगवान शिव की कृपा एवं शांति के लिए मंत्र जाप किया जाता है।
हवन, आरती एवं प्रसाद
विशेष मंत्रों के साथ हवन एवं पूर्णाहुति, फिर आरती और प्रसाद वितरण।
कौन यह पूजा कराए
प्रेत दोष एवं श्रापित दोष पूजा इन परिस्थितियों में कराई जाती है।
श्रापित दोष
कुंडली में श्रापित दोष बताया गया हो।
अधूरे संस्कार
परिवार में अधूरे संस्कार की स्थिति हो।
पारिवारिक बाधाएं
लगातार पारिवारिक बाधाओं का अनुभव हो।
पितृ शांति
पूर्वजों के आशीर्वाद की कामना हो।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रेत दोष पूजा क्यों कराई जाती है?
श्रापित दोष कैसे बनता है?
क्या उज्जैन में यह पूजा कराई जा सकती है?
क्या ऑनलाइन पूजा संभव है?
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